JE KAHI NAHI SAKLAHUN: A Collection of Maithili Ghazals (Corsican Edition)


Worth: ₹ 73.00
(as of Sep 17,2021 01:50:22 UTC – Particulars)


Je Kahi Nahi Saklahun is a set of Ghazals concerning the delicate experiences in life. These ghazals additionally mirror human compassion and sensitivity within the present situation and likewise the orientation in the direction of the trendy philosophy of life.

मैथिलीमे गजलक पहिल गऽब पं. जीवन झा लगौलनि। तकरा बादसँ अनेको महत्त्वपूर्ण सर्जकसभक रोसनाइ गजलकेँ गतगर बनएबामे खर्च होइत रहल। एकरा ओही चिन्तन आ सृजनक प्रतिफल मानल जा सकैत अछि जे मैथिली गजल अपन स्वरूप तथा संरचनापर धरगर एवं निर्मम आलोचनासभसँ पर्यन्त ऊर्जा ग्रहण करैत निरन्तर उपर उठि रहल अछि। एही क्रममे किछुए साल पहिने मैथिली गजल-गगनमे खाँटी गमैया तेज आ ताओक सङ्ग एक युवा कलमकार छिटकैत अछि, जे अपन गाम-घर, खेत-खरिहान, बन्ध-सम्बन्ध एवं देश-दुनियाक बात अपनहि लहजामे समधानल ढङ्गसँ करैत अछि आ छिटकितहिँ भावकक मन-मष्तिष्कमे अपन जगह बना लैत अछि। सहसा सभक ध्यान आकृष्ट कएनिहार ई प्रिय युवा नाम अछि दीपनारायण विद्यार्थी। दीपनारायण मैथिली साहित्यक मन्दिरमे जे दीप बारलनि ओहिसँ समग्र प्रकाशमयता तँ बढ़बे कएल, मन्दिरक ओ कोन्हसभ सेहो इजोतसँ मुस्किआ उठल जे अन्हारकेँ अपन नियति बुझैत छल। नेपाल तथा प्रवासमे मैथिली साहित्यदिस उन्मुख एवं उत्साहजनक सक्रियता देखबैत आएल एकटा नमहर जमात अपन रोल मॉडलक रूपमे हिनका अङ्गीकार कऽ लेलक। एहि तरहेँ कवि/गजलकार विद्यार्थी अपन सृजन-सक्रियतासँ कतेको नवतुरियासभक शिक्षक सेहो बनि गेलथि। … से भाव आ प्रभाव दुनू स्तरपर। हिनक गजलसङ्ग्रहक “जे कहि नञि सकलहुँ” मे जाहि प्रकृतिक विषयसभ जेहन मौलिक बिम्ब-प्रतीकक सङ्ग प्रकट भेल अछि, ताहिमे हमरा बेस मात्रामे अपन माटिपानिक सोन्हगर वैशिष्ट्य भेटैत अछि—भूखलसँ भगवानक गप्पनञि करू भाइ ज्ञानक गप्पहाथमे पहिने रोटी द’ दिअतखन करब सम्मानक गप्पदीप नारायणक गजलमे जीवन–सङ्घर्षक प्राचुर्य भेटैत अछि। आमलोकक जिजीविषा आ दर्दकेँ आत्मसात कऽ लिखाएल एहि गजलसभक शेरसभमे लोक सहजहिँ अपन भावनासँ कदमताल मिलबऽ लगैत अछि। अधिकांशतः भोगल यथार्थक प्रतिबिम्बक रूपमे बहराएल गजलसभ आस-पड़ोसक परिवेशकेँ सेहो विषय बना आगाँ बढ़ल अछि। गजलकार सङ्घर्षसँ घबड़ाइत नहि छथि, किएक तँ गन्तव्य हुनका ठेकनाएल छनि आ ओतबा दूरधरिक यात्राक प्रतिबद्धता सेहो मोनमे छनि—कष्टमे मुस्कियाउ भाइपित्त कनेक दबाउ भाइबात कतबो कडू होअएबात मुदा पचाउ भाइएक रचनाकारक दायित्व समाजमे पसरल विसङ्गतिसभपर आङुर उठा अपन रचनाक माध्यमे आमलोककेँ सचेत कराएब सेहो छैक। दीप एहू काजमे सजग आ प्रतबद्ध छथि। समकालीन संसारक परिचित-अपरिचित छाँहसभक छवि बनबैत हिनक रचनासभ मैथिली गजलक गातकेँ समृद्ध करैत अछि। हिनका माध्यसँ मैथिली गजलकेँ प्रतिष्ठापित होएबाक मौका सेहो भेटलैक— साहित्य अकादमी युवा पुरस्कारक रूपमे। दीपक लेखनी आ लोकप्रियतामे निरन्तर श्रीवृद्धिक कामना करैत इएह कहब— गजलसङ्ग्रह “जे कहि नञि सकलहुँ” क ई दोसर संस्करण आओर वृहद भावक समुदायसमक्ष पहुँच मैथिली गजल आ समग्र मैथिली साहित्यक विस्तृति एवं समृद्धिक सेहो संवाहक बनए। – धीरेन्द्र प्रेमर्षि प्राज्ञ परिषद सदस्य नेपाल सङ्गीत तथा नाट्य प्रज्ञा-प्रतिष्ठान
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